ब्रह्मांड एवं सौरमंडल

 

पृथ्वी की उत्पत्ति कब और कैसे हुई है यह अभी भी शोध का विषय बना हुआ है परंतु यह बात निश्चित तौर पर स्वीकार की जाती है कि पृथ्वी भी ब्रह्मांड का एक सदस्य है और इसकी उत्पत्ति अन्य ग्रहों से भिन्न नहीं हो सकती। अतः विद्वानों ने पृथ्वी की उत्पत्ति के साथ-साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सिद्धांत दिया। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है महा विस्फोट सिद्धांत या बिग बैंग थ्योरी...

   ब्रह्मांड, आकाशगंगा, तारे, ग्रह एवं उपग्रह आदि की उत्पत्ति हेतु दिया गया यह सिद्धांत वर्तमान में सर्वाधिक मान्य सिद्धांत है इसका प्रतिपादन 1960 के दशक में बेल्जियम के पादरी तथा भूगोलवेत्ता जार्ज लेमेंटयर ने किया था।

1967 में रॉबर्ट वेगनर ने इस सिद्धांत में कुछ संशोधन करते हुए इसकी व्याख्या की।

बिग बैंग सिद्धांत दो अवधारणाओं पर आधारित है-

1- काले पदार्थ-

        किसी काले पदार्थ को एकल परमाणु या सिंगुलेरिटी कहा जाता है वर्तमान में हिग्स बोगान तथा गोल्ड पार्टिकल भी कहा गया तथा इसके अंदर स्थित ऊर्जा को डार्क एनर्जी कहा गया । इस डार्क मैटर की दो विशेषताएं हैं-

    A- इसका आयतन न्यूनतम होता है।

    B- इसको तापमान व घनत्व अनंत होता है।

2- बिग बैंग सिद्धांत इस काले पदार्थ में विस्फोट होने को स्वीकार करता है। इसी विस्फोट के स्वीकार करने के कारण इसे बिग बैंग सिद्धांत कहा जाता है।

बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड के सारे पदार्थ 15 अरब वर्ष पूर्व एक काले पदार्थ पर केंद्रित है अचानक इस वाले पदार्थ में विस्फोट होता है और ब्राह्मण का विस्तार होने लगता है इस विस्फोट को ही बिग बैंग अथवा महाविस्फोट कहा जाता है। इस घटना से पहले क्या हुआ इसका किसी को अनुमान नहीं है।

महाविस्फोट सिद्धांत के अनुसार ब्राह्मण की उत्पत्ति आज से लगभग 15 वर्ष पूर्व हुई थी जबकि नासा के नवीनतम शोध के अनुसार 13.7 अरब वर्ष पूर्व मानी जाती है।

बिग बैंग के वैज्ञानिक प्रयोग हेतु स्वीटजरलैंड और फ्रांस की सीमा पर 27 किलोमीटर जमीन के अंदर सुरंग में लार्ज हैड्रन कोलाइडर प्रयोगशाला में big-bang जैसी स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास किया गया जो कि सफल रहा।

                 ब्रह्मांड--

ब्रह्मांड हमारे चारों ओर असीमित दूरी तक तारों, ग्रहों, उपग्रहों, आकाशगंगाओ एवं सूक्ष्म से लेकर सूक्ष्मतम कणों का समूह है,जिसे COSMOS की संज्ञा दी जाती है।

     एक अनुमान के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार लगभग 250 करोड़ प्रकाश वर्ष माना जाता है पृथ्वी जिस पर हम रहते हैं वह सौरमंडल का एक भाग है और सौरमंडल आकाशगंगा का एक भाग है और अनगिनत आकाशगंगा का समूह ही ब्रह्मांड कहलाता है।

ब्रह्मांड के बारे में सर्वप्रथम यूनानियों ने अध्ययन किया था इन्होंने 650 बी सी के मध्य इस संदर्भ में खूब जानकारी उपलब्ध कराई इसलिए इस समय को यूनानियों का स्वर्ण काल कहा जाता है।

इस समय जिओ सेंट्रिक अर्थात भू केंद्रित अवधारणा प्रचलित थी जिसके अनुसार ब्राह्मण के केंद्र में पृथ्वी है और अन्य सभी ग्रह, उपग्रह इत्यादि पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं इस अवधारणा का खंडन 1543 में कॉपरनिकस ने कर दिया और उन्होंने हेलिओसेंट्रिक अर्थात सूर्य केंद्रित अवधारणा दी जिसके अनुसार ब्रह्मांड के केंद्र में पृथ्वी नहीं बल्कि सूर्य है तथा अन्य सभी ग्रह उपग्रह सूर्य का चक्कर लगाते हैं। इस अवधारणा को गैलीलियो ने दूरबीन की खोज करके सिद्ध कर दिया था।

       आकाशगंगा--

आकाशगंगा ब्रह्मांड का ही एक भाग है अर्थात ब्रह्मांड में कई आकाशगंगाए होती हैं तथा आकाशगंगा में अरबों तारे होते हैं दूसरे शब्दों में वृहद क्षेत्र में स्थित अरबो तारो के समूह को आकाशगंगा कहा जाता है तथा कई आकाशगंगाए मिलकर आकाशगंगाओ का समूह बनाती है। औसतन प्रत्येक आकाशगंगा में 100 से 150 अरब तारे होते हैं।

सामान्यतः यह माना जाता है कि प्रत्येक आकाशगंगा के केंद्र में एक ब्लैक होल(कृष्ण छिद्र) होता है।

आकाशगंगा का निर्माण बिग बैंग सिद्धांत के बाद हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादलों के संचय से होता है इसलिए नेबुला या निहारिका कहा जाता है।

कुछ महत्वपूर्ण आकाशगंगा इस प्रकार हैं-

मन्दाकिनी, मेफिला, उर्सा माइनर, स्कल्पटर सिस्टम, ड्रेको सिस्टम।

मन्दाकिनी(Milki Way)---

हमारा सूर्य जिस आकाशगंगा में स्थित है उसे मंदाकिनी कहा जाता है इसका आकार सर्पिला है, इसमें लगभग 100 से 150 मिलीयन तारे हैं मंदाकिनी में तीन घूर्णनशील अर्थात घूमने वाली भुजा पाई जाती है जिसमें हमारा सूर्य दूसरी अर्थात मध्यवर्ती घुलनशील भुजा में स्थित है हमारी मंदाकिनी के केंद्र को बल्ज कहा जाता है इसी केंद्र में ब्लैक होल पाया जाता है।

जिस प्रकार पृथ्वी अपने सूर्य की परिक्रमा 30 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से करती है उसी प्रकार सूर्य भी अपनी मंदाकिनी की परिक्रमा 2220 किलोमीटर प्रति सेकंड के वेग से करता है इसमें 25 करोड वर्ष अथवा 250 मिलियन वर्ष का समय लगता है इसी को ब्रह्मांड वर्ष कहा जाता है।

तारों का जीवन चक्र-

वर्तमान मान्यता के अनुसार तारों का जन्म बिगबैंग के द्वारा हुआ है जिसके केंद्र में नाभिकीय सलंयन लेने की प्रक्रिया होती है जिसमें हाइड्रोजन के दो हल्के नाभिक मिलकर हिलियम के भारी नाभिक का निर्माण करते हैं जिससे ऊर्जा मुक्त होती है जिसे फोटॉन कहा जाता है।


       

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