इंसानियत- महिला के पति को बचाने के लिए बुजुर्ग व्यक्ति ने किया बेड लेने से इनकार

महाराष्ट्र के नागपुर में एक वृद्ध व्यक्ति ने इंसानियत की जिन्दा मिशाल पेश की,

कलयुग में जहाँ लोगो को अपनी-अपनी जान की पड़ी है , वही महाराष्ट्र के बुजुर्ग ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक  महिला के पति को अपना बेड यह कहते हुए दे दिया कि मैंने अपनी जिंदगी जी ली है, मेरे बेड पर इस महिला के पति को भर्ती किया जाए,

                           महाराष्ट्र के नागपुर के एक बुजुर्ग नारायण भाउराव दावाडकर यह आग्रह कर अस्पताल से घर लौट आये, ताकि एक अन्य युवक को जीवनदान मिल सके, हालांकि नारायण भाउराव दावाडकर खुद इतने  कोरोना संक्रमित थे कि अस्पताल से लौटने के तीन दिन बाद ही उनका निधन हो गया l नारायण भाउराव दावाडकर कुछ दिन पहले ही कोरोना संक्रमित हुए थे, उनका ऑक्सीजन स्तर भी 60 था । इसे देखते हुए उनके दामाद ने उन्हें इंदिरा गाँधी शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया था, जहाँ बड़ी सिफारिश के बाद उन्हें बेड उपलब्ध हुआ था हालाँकि इलाज की प्रक्रिया चल ही रही थी कि उसी वक्त एक महिला अपने 40 साल के पति को अस्पताल लेकर आई, जिसकी हालत बहुत गंभीर थी, लेकिन अस्पताल ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया, क्योकि  अस्पताल में बेड खाली नहीं था 

                        ऐसे में वह महिला रोने लगी , उस महिला को रोती देखकर इस बुजुर्ग का मन द्रवित हो उठा और उस महिला के पति को अपना बेड देने का आग्रह किया । उनके आग्रह को देख अस्पताल प्रशासन ने उनसे एक कागज़ पर लिखवाया कि "मै अपना बेड दुसरे मरीज को स्वेच्छा से दे रहा हूँ " 

      हालाँकि तीन दिन बाद ही इंसानियत के इस देवता ने दुनिया को अलविदा कह दिया ।  बुजुर्ग नारायण भाउराव दावाडकर  मरते- मरते दुनिया को इंसानियत का एक सबक सिखा गए 





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