हो तिमिर कितना भी गहरा

 हो तिमिर कितना भी गहरा;

हो रोशनी पर लाख पहरा;

सूर्य को उगना पड़ेगा,

फूल को खिलना पड़ेगा। 


हो समय कितना भी भारी;

हमने ना उम्मीद हारी;

दर्द को झुकना पड़ेगा;

रंज को रुकना पड़ेगा। 


सब थके हैं, सब अकेले;

लेकिन फिर आएंगे मेले;

साथ ही लड़ना पड़ेगा;

साथ ही चलना पड़ेगा।

-साभार 



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